Wednesday, September 14, 2011

,(-_-), '\'''''.\'='-. JAI SHREE KRISHNA ♥ \/..\\,' //"") (\ / \ |,. ,, ', ☆★☆★☆★☆★♥.*.((((((♥)))))*.☆★☆★☆★☆★♥.*


अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये  वंशी.
ये तान दे निराली  बजैया तेरी ये वंशी.
हम सबको बाँधती है तेरी राह और डगर पे-
अब मन नहीं है बस में बसैया तेरी ये वंशी..

ये प्रेम तो अमर है राधा किशन से जग में.
सब लोग दिख रहे है इसमें मगन से जग में.
माहौल प्यार का ये कुदरत तभी बनाये-
जब मन करे समर्पित खुद को बदन से जग में..

दिल हो कदम्ब डाली और मुरली बज रही हो.
उसमें भी  छवि तुम्हारी दर्पण में सज रही हो.
मन मेरा बन के राधा पहलू में हो तुम्हारे-
जीवन सफल हो काया सब मोह तज रही हो ..

तेरे बस में ये जहाँ है हम सब तेरे शरण में.
बस भक्ति तेरी चाहें झुकते तेरे चरण में.
गर दिल लगे भटकने हमें राह पर लगाना-
ये अम्बरीष कहते मन हो तेरे वरण में..

2 comments:

  1. कर तुझको सब समर्पित कब से तेरी शरण में.
    ये अम्बरीष कहते मन हो तेरे वरण में..

    वंशी धुन क्यों मोहती, दुनिया पूछे प्रश्न.
    राधा किससे क्या कहें, हृदय बसे श्रीकृष्ण..
    http://wikisource.org/wiki/कृष्ण_भजन_संग्रह

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  2. बाधाएँ कब बाँध सकी हैं आगे बढ़ने वालों को।
    विपदाएँ कब रोक सकी हैं पथ पर चलने वालों को।।

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