Thursday, September 15, 2011

आ जाओ न!अपने दरस दिखा दो न

तुम क्यों नही अपने दर्शन देते
क्यों सामने आते नहीं हो?
आ जाओ न!अपने दरस दिखा दो न
अपनी वो मधुर वंशी की
कोई प्यार भरी तान सुना दो न
वो वन लटाए,फूल पत्तियां
सब कर रही हैं इंतज़ार
कभी तो आओगे तुम श्याम
कभी तो अपने दरस दिखाओगे
पता हैं तुम यहीं कहीं हो
होता हैं तुम्हारा एहसास
मगर नजाने क्यों
यह मन बेचैन हैं
तुम्हारे मधुर स्वरूप
के दर्शन पाने को
तुम्हें निहारने को
मेरे गिरधर गोपाल
आ जाओ न श्याम!

No comments:

Post a Comment