Monday, September 19, 2011

बिहारी जी मैं बन गयी तुम्हारी


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LOVE________¶¶¶(¯`()´¯)¶¶
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MY____________ ¶¶¶¶¶
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_KRISHNA_____________


बन गयी बन गयी बन गयी,
बिहारी जी मैं बन गयी तुम्हारी ।

मैं तो तेरे मुख की मुरलिया ।
तुम हो तान हमारी ॥

मैं तो तेरे माथे की बिंदिया ।
तुम हो चमक हमारी ॥

मैं तो तेरे आँखों की पुतली ।
तुम काजल की कारी ॥

मैं तो तेरे पाँव की पायल ।
तुम झंकार हमारी ॥

मैं तो तेरे दिल की धड़कन ।
तुम हो जान हमारी ॥

सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है

सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
चलो सत्संगे में चलें, हमे हरी गुण गाना है ॥

कहाँ कहाँ ढूँढा तुझे, कहाँ कहाँ पाया है ।
भक्तो के हृदय में मेरे श्याम का ठीकाना है ॥

राधा ने पाया तुझे मीरा ने पाया तुझे ।
मैंने तुझे पा ही लिया, मेरे दिल में ठिकाना है ॥

सत्संगे में आ जाओ, संतो संग बैठ जाओ ।
संतो के हृदय में, मेरे श्याम का ठिकाना है ॥

मीरा पुककर रही, आवो मेरे बनवारी ।
विष भरे प्याले को, तुने अमृत बनाना है ॥

शबरी पुककर रही, आओ मेरे रघुराई ।
खट्टे मीठे बेरों का तोहे भोग लगाना है ॥

द्रोपती पुकार रही, आवो मेरे कृष्णाई ।
चीर को बढाना है, तुम्हे लाज को बचाना है ॥

मथुरा में डूंडा तुझे, गोगुल के पाया है ।
वृन्दावन की गालिओ में मेरे श्याम का ठिकाना है ॥


कृष्ण


सब कुछ ही बिक चुका हैं
तेरे प्यार में कन्हैया
तन मन की सुध भी भूली
तेरे ख्याल में कन्हैया
बंसी की धुन पे मोहन,दुनिया नचा रहे हो
नाचे थे खुद भी मोहन,फन नाग पे कन्हैया
राधा पुकारें कान्हा,बडे प्यार से कन्हैया
मस्ती की इस डगर पे,काँटो की सेज देखी
रुकना नही हैं सीखा,तेरे प्यार में कन्हैया
'हरिदासी' लाज रख लो,पांचाली के कन्हैया
हमे पार कर तो देना, दिलदार ओह कन्हैया








Sunday, September 18, 2011

about krishna-------

1-Krishna means "attractive force" and that everything that attracts us is but a glimpse of one of Krishna's many powers.
2-There was a time in my own life also when my conceptions of God as a person proved inadequate."
3-If God is unlimited, why it is so difficult for people to think of Him as a person?
4-Radha-Krishna are the male and female aspects of God. Known as the Divine Couple, together they are the full manifestation of God.
5-Is God an idea? A quality? A white light? Or do these conceptions ignore the most important feature of the Supreme?
6-Lust isn’t love, so it doesn’t last. But the love between the gopis and Krishna never breaks. That is the difference between lust and love

7-God—in His majesty—is "God at work." Krishna is "God at home."
8-An introduction to the Supreme Goddess, Krishna's spiritual energy personified, the female aspect of God, Srimati Radharani.
8-Who Krishna is—brief descriptions of His nature, energies, pastimes, form, and authorized biography, the Srimad-Bhagavatam.
9-Without hearing from self-realized souls, we can easily misunderstand the transcendental significance of Krishna’s “immoral” acts.
The Vedas say Krishna is the original person, but that He always appears young and attractive. He knows everything, He contains all of reality, and all other living beings are His inseparable parts. He is the all-powerful, supreme controller of all energies. He is known by different names in different cultures (such as God, Allah, and Jehovah, for example).
Sometimes Krishna sends His representatives—as saints, prophets, or His sons—to teach humankind about Him, and sometimes He comes Himself, as He did approximately 3000 B.C. He spoke the spiritual and philosophical teachings known as the Bhagavad-gita, which explains the essence of our spiritual identity and our relationship with God..



C
.





Thursday, September 15, 2011

यादो के पल वो लगते हैं प्यारे

राधा कृष्णा को पल पल पुकारे
यादो के पल वो लगते हैं प्यारे
झुकी झुकी यह पलकेअब क्यूँ है छलके.
जब कृष्णा भी राधाराधा पुकारे...

मन से मन का मेल यही है ,प्रीत ऐसे ही दिल में पले
राधा ने जब कृष्ण को देखा ,आँखो में सौ दीप जले...

मन से मन का मेल यही है ,प्रीत ऐसे ही दिल में पले
राधा ने जब कृष्ण को देखा ,आँखो में सौ दीप जले
होंठो पर ठहरी बातो को, नयनो की भाषा मिले

यूँ ही आँखो आँखो में प्यार की दास्तान बढे
राधा ने जब कृष्ण को देखा दिल में प्रीत के कमल खिले

सुन बंसी की लय कृष्णा की, राधा के दिल का फूल खिले
तेरे मेरे प्यार का गीत बस वैसे प्रीत की डगर चले
राधा ने जब कृष्ण को देखा संगीत प्यार का दिल में पाले

जिस एक राग को जल उठाते दोनो दिलो के दीपक
आज अपने मधुर मिलन में उसी राग का दौर चले

प्यास जो देखी थी उस दिन तेरे मीठे लबो पर
वही मीठी मीठी प्यास अब मेरे दिल में भी पाले
राधा ने जब कृष्णा को देखा मन में सौ दीप जले!!

तेरे रूप में ऐसा जादू हैं


तेरे रूप में ऐसा जादू हैं
तुझे निहारूं हर वकत
मन मेरा बेकाबू हैं
तेरी आँखों में
खुद को समाए जाती हूँ
अपनी सारी दुनिया तुझी में
बसाये जाती हूँ
तेरे होंठों की मुस्कराहट
को बस! निहारे जाती हूँ
तेरे इस श्रृंगार को बस!
मन में बसाये जाती हूँ
तेरा यह रूप जो अब
मेरी आँखों में समाया हैं
अब पलकें कैसे झुकाऊ
अब तू जो इन नैनन में
मनबसिया आन समाया हैं

♥♥ Jai Shri Krishna ♥♥

आ जाओ न!अपने दरस दिखा दो न

तुम क्यों नही अपने दर्शन देते
क्यों सामने आते नहीं हो?
आ जाओ न!अपने दरस दिखा दो न
अपनी वो मधुर वंशी की
कोई प्यार भरी तान सुना दो न
वो वन लटाए,फूल पत्तियां
सब कर रही हैं इंतज़ार
कभी तो आओगे तुम श्याम
कभी तो अपने दरस दिखाओगे
पता हैं तुम यहीं कहीं हो
होता हैं तुम्हारा एहसास
मगर नजाने क्यों
यह मन बेचैन हैं
तुम्हारे मधुर स्वरूप
के दर्शन पाने को
तुम्हें निहारने को
मेरे गिरधर गोपाल
आ जाओ न श्याम!

कब आओगे प्राण प्यारे

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जानते हो तुम के
तुम्ही हो दिल-ओ जान हमारे
फिर भी इतना स्ताते हो मोहन
सामने आने से यूं इतराते हो मोहन
इक दिन तो तुम्हें आना ही होगा
हमारी दर्शनों की प्यासी निगाहों को
दरस अपना दिखाना ही होगा
मगर वो पल जाने किस पल आएगा
जब होंगे दरस तुम्हारे
कब आओगे मोहन हमारे!

♥♥ Jai Shri Krishna ♥♥

Wednesday, September 14, 2011

हर चीज मैं तू समाया हैं


श्याम कोई ऐसी बात बना दे
हर शय में अक्स तू मोहे अपना दिखा दे
हर चीज मैं तू समाया हैं
जीव निर्जीव हर किसी में तूने अपना घर बनाया हैं
इस अधम को भी तूने अपनाया हैं
अब जरा अपने दर्शन भी करवा दे
चाहे किसी भी रूप मैं आना मोहन
बस सिर मोरमुकुट कर मुरली
उर माल पहनते आना
अपने प्यारे अधरन पे धर बांसुरी
कोई तान मीठी सुनाते आना
कट पीट पीताम्बर कमरबन्ध लाल पहनते आना
पाँव मैं नुपुर,हाथ में कंगन छनकते आना
श्यामवर्ण श्याम भाल पे तिलक विशाल लगाते आना
जुल्फे प्यारी हवा में लहराते आना
अधरं मुस्कान सजाते आना
श्याम मेरे राधा जू को संग लेते आना
फिर करूंगी में श्यामा जू से विनती
के मोहे श्यामा अपने दल में मिला लो
मोहे बिहारी जी की बना दो.
श्याम कोई ऐसी बात बना दे
हर शय में अक्स तू मोहे अपना दिखा दे
हर चीज मैं तू समाया हैं
जीव निर्जीव हर किसी में तूने अपना घर बनाया हैं
इस अधम को भी तूने अपनाया हैं
अब जरा अपने दर्शन भी करवा दे
चाहे किसी भी रूप मैं आना मोहन
बस सिर मोरमुकुट कर मुरली
उर माल पहनते आना
अपने प्यारे अधरन पे धर बांसुरी
कोई तान मीठी सुनाते आना
कट पीट पीताम्बर कमरबन्ध लाल पहनते आना
पाँव मैं नुपुर,हाथ में कंगन छनकते आना
श्यामवर्ण श्याम भाल पे तिलक विशाल लगाते आना
जुल्फे प्यारी हवा में लहराते आना
अधरं मुस्कान सजाते आना
श्याम मेरे राधा जू को संग लेते आना
फिर करूंगी में श्यामा जू से विनती
के मोहे श्यामा अपने दल में मिला लो
मोहे बिहारी जी की बना दो.

♥♥ Jai Shri Krishna ♥♥


जय कृष्ण हरे

,(-_-),
'\'''''.\'='-. JAI SHREE KRISHNA ♥
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,, ', ☆★☆★☆★☆★♥.*.((((((♥)))))*.☆★☆★☆★☆★♥.*
जय कृष्ण हरे  
जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे . 
दुखियों के दुख दूर करे जय जय जय कृष्ण हरे .. 

जब चारों तरफ़ अंधियारा हो आशा का दूर किनारा हो . 
जब कोई ना खेवन हारा हो तब तू ही बेड़ा पार करे . 
तू ही बेड़ा पार करे जय जय जय कृष्ण हरे .. 

तू चाहे तो सब कुछ कर दे विष को भी अमृत कर दे . 
पूरण कर दे उसकी आशा जो भी तेरा ध्यान धरे . 
जो भी तेरा ध्यान धरे जय जय जय कृष्ण हरे .. 

कृष्ण

चित्र:Krishn-title.jpg
मुकुन्द माधव गोविन्द बोल 
केशव माधव हरि हरि बोल .. 

हरि हरि बोल हरि हरि बोल . 
कृष्ण कृष्ण बोल कृष्ण कृष्ण बोल .. 

राम राम बोल राम राम बोल . 
शिव शिव बोल शिव शिव बोल . 

भज मन गोविंद गोविंद 
भज मन गोविंद गोविंद गोपाला .. 

,(-_-), '\'''''.\'='-. JAI SHREE KRISHNA ♥ \/..\\,' //"") (\ / \ |,. ,, ', ☆★☆★☆★☆★♥.*.((((((♥)))))*.☆★☆★☆★☆★♥.*


अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये  वंशी.
ये तान दे निराली  बजैया तेरी ये वंशी.
हम सबको बाँधती है तेरी राह और डगर पे-
अब मन नहीं है बस में बसैया तेरी ये वंशी..

ये प्रेम तो अमर है राधा किशन से जग में.
सब लोग दिख रहे है इसमें मगन से जग में.
माहौल प्यार का ये कुदरत तभी बनाये-
जब मन करे समर्पित खुद को बदन से जग में..

दिल हो कदम्ब डाली और मुरली बज रही हो.
उसमें भी  छवि तुम्हारी दर्पण में सज रही हो.
मन मेरा बन के राधा पहलू में हो तुम्हारे-
जीवन सफल हो काया सब मोह तज रही हो ..

तेरे बस में ये जहाँ है हम सब तेरे शरण में.
बस भक्ति तेरी चाहें झुकते तेरे चरण में.
गर दिल लगे भटकने हमें राह पर लगाना-
ये अम्बरीष कहते मन हो तेरे वरण में..

कृष्ण

चित्र:Krishn-title.jpg
संक्षिप्त परिचय
कृष्ण
अन्य नामद्वारिकाधीश, केशव, गोपाल, नंदलाल, बाँके बिहारी, कन्हैया, गिरधारी, मुरारी आदि
अवतारसोलह कला युक्त पूर्णावतार (विष्णु)
वंश-गोत्रवृष्णि वंश (चंद्रवंश)
कुलयदुकुल
पितावसुदेव
मातादेवकी
पालक पितानंदबाबा
पालक मातायशोदा
जन्म विवरणभादों कृष्णा अष्टमी
समय-कालमहाभारत काल
परिजनरोहिणी संतान बलराम (भाई),सुभद्रा (बहन), गद (भाई)
गुरुसंदीपनआंगिरस
विवाहरुक्मिणीसत्यभामाजांबवती, मित्रविंदा, भद्रा, सत्या, लक्ष्मणा,कालिंदी
संतानप्रद्युम्न
विद्या पारंगतसोलह कला, चक्र चलाना
रचनाएँगीता
शासन-राज्यद्वारिका
संदर्भ ग्रंथमहाभारतभागवतछान्दोग्य उपनिषद
मृत्युपैर में तीर लगने से
यशकीर्तिद्रौपदी के चीरहरण में रक्षा करना।कंस का वध करके उग्रसेन को राजा बनाना।
सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार माने जाते हैं ।
मथुरा नगरी इस महान विभूति का जन्मस्थान होने के कारण धन्य हो गई। मथुरा ही नहीं, सारा शूरसेन या ब्रज जनपद आनंदकंद कृष्ण की मनोहर लीलाओं की क्रीड़ाभूमि होने के कारण गौरवान्वित हो गया। मथुरा और ब्रज को कालांतर में जो असाधारण महत्व प्राप्त हुआ वह इस महापुरुष की जन्मभूमि और क्रीड़ाभूमि होने के कारण ही श्रीकृष्ण भागवत धर्म के महान स्त्रोत हुए। इस धर्म ने कोटि-कोटि भारतीय जन का अनुरंजन तो किया ही,साथ ही कितने ही विदेशी इसके द्वारा प्रभावित हुए। प्राचीन और अर्वाचीन साहित्य का एक बड़ा भाग कृष्ण की मनोहर लीलाओं से ओत-प्रोत है। उनके लोकरंजक रूप ने भारतीय जनता के मानस-पटली पर जो छाप लगा दी है, वह अमिट है।

नारद कृष्ण संवाद

नारद कृष्ण संवाद ने कृष्ण के सम्बन्ध में कई बातें हमें स्पष्ट संकेत देती हैं कि कृष्ण ने भी एक सहज संघ मुखिया के रूप में ही समस्याओं से जूझते हुए समय व्यतीत किया होगा । श्रीकृष्ण मंझले भाई थे। उनके बड़े भाई का नाम बलराम था जो अपनी शक्ति में ही मस्त रहते थे। उनसे छोटे का नाम 'गद' था। वे अत्यंत सुकुमार होने के कारण श्रम से दूर भागते थे। श्रीकृष्ण के बेटे प्रद्युम्न अपने दैहिक सौंदर्य से मदासक्त थे। कृष्ण अपने राज्य का आधा धन ही लेते थे, शेष यादववंशी उसका उपभोग करते थे। श्रीकृष्ण के जीवन में भी ऐसे क्षण आये जब उन्होंने अपने जीवन का असंतोष नारद के सम्मुख कह सुनाया और पूछा कि यादववंशी लोगों के परस्पर द्वेष तथा अलगाव के विषय में उन्हें क्या करना चाहिए। नारद ने उन्हें सहनशीलता का उपदेश देकर एकता बनाये रखने को कहा।