कहा मैं ढूँढू तुझको
ओह घट घट के वासी श्याम
जिस और मैं निहारु तुझको
नजारा तेरा ही पाउ मै श्याम
आसमाँ का रंग भी नीला
मेरा श्याम भी छैल छबीला
हाय!मोहन तू भी तो हैं नीला
आसमाँ का रंग भी हैं नीला
नीली आभा तेरी लागे प्यारी
तूने मुरली से सजाई ऋतुएं सारी
आसमाँ मै बिजुरी का यू चमकना
ऐसा लागे मानो कान्हा तेरा हँसना
तू देगा कब अपने दर्शन
राह ताकू मैं ओह मेरे नटवर
रहता हैं तू छिपा मेरे सामने
अब तो आजा दे दे दर्शन ओह साँवरे
ओह घट घट के वासी श्याम
जिस और मैं निहारु तुझको
नजारा तेरा ही पाउ मै श्याम
आसमाँ का रंग भी नीला
मेरा श्याम भी छैल छबीला
हाय!मोहन तू भी तो हैं नीला
आसमाँ का रंग भी हैं नीला
नीली आभा तेरी लागे प्यारी
तूने मुरली से सजाई ऋतुएं सारी
आसमाँ मै बिजुरी का यू चमकना
ऐसा लागे मानो कान्हा तेरा हँसना
तू देगा कब अपने दर्शन
राह ताकू मैं ओह मेरे नटवर
रहता हैं तू छिपा मेरे सामने
अब तो आजा दे दे दर्शन ओह साँवरे

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ReplyDeletesri radhey
krishna akarshini gauri