कृपा कीजो कृपा कर कृपा अपनी दीजो
मोहे अपनी मोहिनी रूप माधुरी की
श्यामसुंदर इक झलक दिखाए दीजो
श्यामसुंदर कृपा कीजो
हर पल अंग संग मेरे तुम रहा कीजो
मुझ में आ तुम समाए जाओ श्याम
मोहे घट भीतर ही तुम
अपने दरस करवाए जाओ श्याम
मोहे प्रेम सिन्धु में डूबकिया लगवाये जाओ श्याम
मोहे अपना बनाये जाओ श्याम
मोहे अपनी मोहिनी रूप माधुरी की
श्यामसुंदर इक झलक दिखाए दीजो
श्यामसुंदर कृपा कीजो
हर पल अंग संग मेरे तुम रहा कीजो
मुझ में आ तुम समाए जाओ श्याम
मोहे घट भीतर ही तुम
अपने दरस करवाए जाओ श्याम
मोहे प्रेम सिन्धु में डूबकिया लगवाये जाओ श्याम
मोहे अपना बनाये जाओ श्याम

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ReplyDeleteकृष्ण(_¸.♥’´(_¸*.¸श्री राधे !!¸*.¸_)`’♥.¸_)कृष्ण
कृष्ण (_¸.♥’´(_¸.*’¸.**.¸’*.¸_)`’♥.¸_)राधे`कृष्ण
`कृष्ण-’(_¸.♥’´(_¸.**.¸_)`’♥.¸_)राधे`कृष्ण
राधे`कृष्ण-`(_¸.♥ ‘♥.¸_)श्री कृष्ण: शरणम् मम:!!
.•♥•.══◄.•♥•.श्री कृष्ण: शरणम् मम:!!.•♥•.►══.•♥•.
*”˜˜”*•.•♥•..•*˜”*°श्री राधे !!°*”˜*•..•♥•..•*”˜˜”*