Wednesday, July 4, 2012
Friday, February 3, 2012
makhan cho
|
Wednesday, January 18, 2012
फूलों मैं सज रहे है श्री वृन्दावन बिहारी,
फूलों मैं सज रहे है श्री वृन्दावन बिहारी,
और साथ सज रही है वृषभानु की दुलारी,
तिरछा सा मुकुट सर पे रखा है किस अदा से,
करुना बरस रही है करुना भरी निगाह से,
बिन मोल बिक गया हूँ जब से छबी निहारी,
फूलों मैं सज रहे है श्री वृन्दावन बिहारी,
सिगार तेरा प्यारे शोभा कहूं क्या इसकी,
एक पे गुलाबी पट्टा एक पे गुलाबी साड़ी,
एक नन्द का है छोरा एक भानु की दुलारी,
फूलों मैं सज रहे है श्री वृन्दावन बिहारी,
चुन चुन के कलिया जिस ने दरबार है सजाया,
इन आभुशनो से जिसने तुम्हे सजाया,
उन हाथो के मैं सदके उन हाथो पे मैं वारी,
फूलों मैं सज रहे है
Subscribe to:
Comments (Atom)






